श्रीकृष्ण बाल लीलाएँ पुस्तक कवर

श्रीकृष्ण बाल लीलाएँ

गोकुल की मधुर कथाएँ

बाल कृष्ण की शरारतों, माखन चोरी, माता यशोदा के प्रेम और गोकुल की दिव्य लीलाओं की सरल हिंदी कथाएँ पढ़ें।

इस पुस्तक की हिंदी कथाएँ

कृष्ण और रुक्मिणी: रुक्मिणी के हृदय में कृष्ण और जरासंध की प्रतिशोध-तैयारी का चित्र

कृष्ण और रुक्मिणी: रुक्मिणी के हृदय में कृष्ण और जरासंध की प्रतिशोध-तैयारी

कंस के वध का समाचार विदर्भ पहुँचा, तो रुक्मी ने कृष्ण को ग्वाला कहा, पर रुक्मिणी ने साफ कहा कि कृष्ण मथुरा के राजवंश से हैं। उसी दिन से कृष्ण रुक्मिणी के हृदय के नायक बन गए, जबकि जरासंध प्रतिशोध की नई तैयारी में जुट गया। पढ़ें पूरी कथा।

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रुक्मिणी का कृष्ण प्रेम: रुक्मिणी का अटल संकल्प और ब्राह्मण सुनंद के हाथ भेजा संदेश का चित्र

रुक्मिणी का कृष्ण प्रेम: रुक्मिणी का अटल संकल्प और ब्राह्मण सुनंद के हाथ भेजा संदेश

भीष्मक कृष्ण को अपना दामाद बनाना चाहते थे, पर रुक्मी ने शिशुपाल का नाम सुझाया। रुक्मिणी ने श्रीकृष्ण को ही जीवनसाथी मानने का संकल्प किया और ब्राह्मण सुनंद के हाथ कृष्ण को संदेश भेजने का निश्चय किया। पढ़ें पूरी कथा।

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द्वारका में सुनंद: कृष्ण को रुक्मिणी का पत्र और जरासंध की तैयारी का चित्र

द्वारका में सुनंद: कृष्ण को रुक्मिणी का पत्र और जरासंध की तैयारी

कई दिनों की यात्रा के बाद ब्राह्मण सुनंद द्वारका पहुँचा और रुक्मिणी का पत्र श्रीकृष्ण को सौंपा। पत्र पढ़कर कृष्ण ने विदर्भ जाने का निश्चय किया, उधर शिशुपाल के प्रस्ताव से जरासंध सतर्क हो गया। पढ़ें पूरी कथा।

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कृष्ण का विदर्भ जाना: पार्वती मंदिर में रुक्मिणी की प्रार्थना और श्रीकृष्ण का रथ का चित्र

कृष्ण का विदर्भ जाना: पार्वती मंदिर में रुक्मिणी की प्रार्थना और श्रीकृष्ण का रथ

जरासंध की सेना विदर्भ की ओर बढ़ी तो बलराम भी सेना लेकर कृष्ण के पीछे चल पड़े। देवी पार्वती के मंदिर में रुक्मिणी ने कृष्ण को ही पति रूप में माँगा और मंदिर से लौटते समय श्रीकृष्ण ने उसे अपने रथ पर बैठा लिया। पढ़ें पूरी कथा।

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कृष्ण व रुक्मिणी का विवाह: रुक्मी का दंड, जरासंध की पराजय और द्वारका में विवाह का चित्र

कृष्ण व रुक्मिणी का विवाह: रुक्मी का दंड, जरासंध की पराजय और द्वारका में विवाह

रुक्मिणी को लेकर कृष्ण के निकल जाने पर जरासंध क्रोध से भर उठा, पर बलराम की सेना के आगे उसे लौटना पड़ा। रुक्मी ने कृष्ण का पीछा किया, लेकिन रुक्मिणी की प्रार्थना पर कृष्ण ने उसके प्राण नहीं लिए। अंत में द्वारका में कृष्ण-रुक्मिणी का धूमधाम से विवाह हुआ। पढ़ें पूरी कथा।

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भीम का प्रहार: राजसूय यज्ञ, कृष्ण की युक्ति और जरासंध से सत्ताईस दिन का मल्लयुद्ध का चित्र

भीम का प्रहार: राजसूय यज्ञ, कृष्ण की युक्ति और जरासंध से सत्ताईस दिन का मल्लयुद्ध

जरासंध ने सहानुभूति रखने वाले राजाओं को बंदी बना लिया और युधिष्ठिर के राजसूय यज्ञ के मार्ग में खड़ा हो गया। कृष्ण, अर्जुन और भीम ब्राह्मण वेश में मगध पहुँचे और जरासंध को मल्लयुद्ध की चुनौती दी। सत्ताईस दिन तक भीम और जरासंध का भीषण संग्राम चलता रहा। पढ़ें पूरी कथा।

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जरासंध की मौत: कृष्ण का तिनके से संकेत और भीम के हाथों अत्याचारी का अंत का चित्र

जरासंध की मौत: कृष्ण का तिनके से संकेत और भीम के हाथों अत्याचारी का अंत

अट्ठाइसवें दिन भीम और जरासंध का मल्लयुद्ध निर्णायक मोड़ पर पहुँचा। जरासंध के शरीर के टुकड़े बार-बार जुड़ते रहे, तब कृष्ण ने एक तिनके को चीरकर विपरीत दिशाओं में फेंककर भीम को संकेत दिया और अत्याचारी जरासंध मारा गया। पढ़ें पूरी कथा।

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कृष्ण और शिशुपाल: राजसूय यज्ञ में अपमान, बुआ को दिया वचन और सुदर्शन चक्र का चित्र

कृष्ण और शिशुपाल: राजसूय यज्ञ में अपमान, बुआ को दिया वचन और सुदर्शन चक्र

राजसूय यज्ञ में कृष्ण को सर्वप्रथम सम्मान मिलने पर शिशुपाल क्रोध से भर उठा और उन्हें अपशब्द कहने लगा। कृष्ण अपनी बुआ को दिए वचन के कारण उसके सौ अपराध क्षमा करने को बँधे थे। जब सीमा पूरी हुई, तो सुदर्शन चक्र ने शिशुपाल का अंत कर दिया। पढ़ें पूरी कथा।

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