श्रीकृष्ण बाल लीलाएँ पुस्तक कवर

श्रीकृष्ण बाल लीलाएँ

गोकुल की मधुर कथाएँ

बाल कृष्ण की शरारतों, माखन चोरी, माता यशोदा के प्रेम और गोकुल की दिव्य लीलाओं की सरल हिंदी कथाएँ पढ़ें।

इस पुस्तक की हिंदी कथाएँ

गोवर्धन धारण: कृष्ण ने उँगली पर उठाया पर्वत और तोड़ा इंद्र का घमंड का चित्र

गोवर्धन धारण: कृष्ण ने उँगली पर उठाया पर्वत और तोड़ा इंद्र का घमंड

वृंदावन के लोग इंद्र के लिए यज्ञ की तैयारी कर रहे थे, तब कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत और गौओं की पूजा का सुझाव दिया। क्रोधित इंद्र ने प्रलय जैसी वर्षा कर दी, और कृष्ण ने सात दिन तक पर्वत को अपनी उँगली पर उठाए रखा। पढ़ें पूरी कथा।

अध्याय 25: पूरी कथा पढ़ें →
रासलीला: शरद पूर्णिमा की रात कृष्ण और गोपियों का दिव्य नृत्य का चित्र

रासलीला: शरद पूर्णिमा की रात कृष्ण और गोपियों का दिव्य नृत्य

शरद पूर्णिमा की चाँदनी रात में कृष्ण की बाँसुरी सुनकर गोपियाँ सब कुछ छोड़कर दौड़ पड़ीं। कृष्ण ने हर गोपी के साथ नृत्य करने के लिए उतने ही रूप धारण कर लिए। पढ़ें रासलीला की पूरी कथा।

अध्याय 26: पूरी कथा पढ़ें →
गंधर्व की मुक्ति: कृष्ण ने अजगर बने विद्याधर को शाप से मुक्त किया का चित्र

गंधर्व की मुक्ति: कृष्ण ने अजगर बने विद्याधर को शाप से मुक्त किया

शिवरात्रि पर अम्बिका वन में सोते हुए नंद को एक विशाल अजगर निगलने लगा। कृष्ण ने अपने पैर से प्रहार किया तो अजगर गंधर्व विद्याधर बन गया और उसे ऋषि अंगिरा के शाप से मुक्ति मिली। पढ़ें पूरी कथा।

अध्याय 27: पूरी कथा पढ़ें →
शंखचूड़ वध: गोपियों का हरण करने वाले कुबेर के सहयोगी का अंत का चित्र

शंखचूड़ वध: गोपियों का हरण करने वाले कुबेर के सहयोगी का अंत

वन में कृष्ण की बाँसुरी पर गोपियाँ नृत्य कर रही थीं, तभी कुबेर के कुटिल सहयोगी शंखचूड़ ने कुछ गोपियों का हरण कर लिया। कृष्ण ने उसका पीछा करके उसे मार गिराया और उसके मस्तक की मणि बलराम को भेंट की। पढ़ें पूरी कथा।

अध्याय 28: पूरी कथा पढ़ें →
अरिष्टासुर वध: साँड़ बनकर आए राक्षस का कृष्ण के हाथों अंत का चित्र

अरिष्टासुर वध: साँड़ बनकर आए राक्षस का कृष्ण के हाथों अंत

कंस ने राक्षस अरिष्टासुर को वृंदावन भेजा, जिसने साँड़ का रूप धरकर खेत और चरागाह उजाड़ दिए। किसानों की पुकार पर कृष्ण ने उसके सींग पकड़कर उसे पटक दिया और उसी के सींग से उसका वध कर दिया। पढ़ें पूरी कथा।

अध्याय 29: पूरी कथा पढ़ें →
केशासुर वध: घोड़ा बनकर आए राक्षस का कृष्ण के हाथों अंत का चित्र

केशासुर वध: घोड़ा बनकर आए राक्षस का कृष्ण के हाथों अंत

अरिष्टासुर की मौत से भयभीत कंस ने अपने अंतिम अस्त्र केशासुर को विशाल जंगली घोड़े के रूप में वृंदावन भेजा। कृष्ण ने उसके मुँह में हाथ डालकर उसका अंत कर दिया। पढ़ें पूरी कथा।

अध्याय 30: पूरी कथा पढ़ें →
नारद कंस के पास: कृष्ण-बलराम को मारने के लिए कंस की नई चाल का चित्र

नारद कंस के पास: कृष्ण-बलराम को मारने के लिए कंस की नई चाल

केशासुर की मौत से बौखलाए कंस के पास नारद मुनि पहुँचे और उसे उसकी मृत्यु की चेतावनी दी। इसके बाद कंस ने धनुर्यज्ञ के बहाने कृष्ण और बलराम को बुलाकर मरवाने की योजना बनाई। पढ़ें पूरी कथा।

अध्याय 31: पूरी कथा पढ़ें →
अक्रूर के साथ कंस: कृष्ण-बलराम को मथुरा बुलाने भेजे गए अक्रूर का चित्र

अक्रूर के साथ कंस: कृष्ण-बलराम को मथुरा बुलाने भेजे गए अक्रूर

कंस ने स्वामिभक्त अक्रूर को वृंदावन भेजा ताकि वे कृष्ण और बलराम को यज्ञ के बहाने मथुरा ले आएँ। अक्रूर मन में श्रीकृष्ण के दर्शन की आस लिए चले और वृंदावन पहुँचकर उन्होंने नंद को कंस की असली योजना बता दी। पढ़ें पूरी कथा।

अध्याय 32: पूरी कथा पढ़ें →