
आकाशवाणी: कंस, देवकी और वासुदेव की कथा
देवकी के विवाह के दिन हुई आकाशवाणी ने कंस को भयभीत कर दिया। वासुदेव के वचन से देवकी के प्राण बचे, पर दोनों कारागार में डाल दिए गए। पढ़ें पूरी कथा।
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बाल कृष्ण की शरारतों, माखन चोरी, माता यशोदा के प्रेम और गोकुल की दिव्य लीलाओं की सरल हिंदी कथाएँ पढ़ें।

देवकी के विवाह के दिन हुई आकाशवाणी ने कंस को भयभीत कर दिया। वासुदेव के वचन से देवकी के प्राण बचे, पर दोनों कारागार में डाल दिए गए। पढ़ें पूरी कथा।
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नारद मुनि के भड़काने पर कंस ने देवकी के छह नवजात पुत्रों का वध कर दिया। सातवें शिशु को दैवी शक्ति से रोहिणी के गर्भ में पहुँचा दिया गया, जो आगे चलकर बलराम कहलाए। पढ़ें पूरी कथा।
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श्रावण कृष्ण अष्टमी की तूफानी मध्यरात्रि में कारागार में श्रीकृष्ण का जन्म हुआ। वासुदेव उन्हें टोकरी में लेकर शेषनाग की छाया में उफनती यमुना पार कर गोकुल पहुँचे। पढ़ें पूरी कथा।
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वासुदेव श्रीकृष्ण को लेकर आधी रात गोकुल में नंद के घर पहुँचे। नंद ने मित्र का मान रखते हुए अपनी नवजात पुत्री से बालक की अदला-बदली की और वासुदेव कन्या को लेकर कारागार लौट आए। पढ़ें पूरी कथा।
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नंद के घर पुत्र के जन्म पर पूरा गोकुल उत्सव में डूब गया और स्वर्ग में भी देवता पुष्पवर्षा करने लगे। बालक का साँवला रूप देखकर सभी ने उसका नाम 'कृष्ण' रखा। पढ़ें पूरी कथा।
अध्याय 5: पूरी कथा पढ़ें →
कंस के आदेश पर शिशुओं का वध करती पूतना गोपी का रूप धरकर गोकुल पहुँची और विषैला दूध पिलाकर बालकृष्ण को मारना चाहा, पर कृष्ण ने उसके प्राण ही खींच लिए। पढ़ें पूरी कथा।
अध्याय 6: पूरी कथा पढ़ें →
पूतना की मृत्यु के बाद कंस ने मायावी दानव तृणावर्त को भेजा, जो चक्रवाती तूफान बनकर बालकृष्ण को उड़ा ले गया। पर कृष्ण का भार बढ़ता गया और तृणावर्त धरती पर गिरकर मारा गया। पढ़ें पूरी कथा।
अध्याय 7: पूरी कथा पढ़ें →
वासुदेव ने बलराम को सुरक्षा के लिए गोकुल में नंद के संरक्षण में छोड़ दिया और दोनों भाई साथ पलने लगे। एक दिन बालकृष्ण ने बैलगाड़ी पर लात मारी और गाड़ी उछलकर दूर जा गिरी। पढ़ें पूरी कथा।
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