
कृष्ण और दानव मुर का वध: प्राग्ज्योतिषपुर की कथा
नरकासुर की नगरी में कृष्ण ने सारी बाधाएँ पार कीं और पाँच सिरों वाले दानव मुर का अंत किया। पढ़ें पूरी कथा।
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बाल कृष्ण की शरारतों, माखन चोरी, माता यशोदा के प्रेम और गोकुल की दिव्य लीलाओं की सरल हिंदी कथाएँ पढ़ें।

नरकासुर की नगरी में कृष्ण ने सारी बाधाएँ पार कीं और पाँच सिरों वाले दानव मुर का अंत किया। पढ़ें पूरी कथा।
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मुर और उसके पुत्रों का अंत देखकर क्रोधित नरकासुर विशाल सेना के साथ युद्धभूमि में उतरा, पर गरुड़ ने उसके हाथियों को भगा दिया और श्रीकृष्ण के चक्र ने पलक झपकते ही उसका मस्तक धड़ से अलग कर दिया। देवी पृथ्वी की प्रार्थना पर कृष्ण ने भगदत्त को अभयदान दिया, सोलह सौ बंदिनियों को मुक्त कराया और अदिति के कुंडल तथा वरुण का छाता लौटाने अमरावती चले। पढ़ें पूरी कथा।
अध्याय 58: पूरी कथा पढ़ें →
महाभारत के युद्ध में श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया और धर्म की विजय के बाद द्वारका लौट आए। अभिमानी यादव प्रभास में आपस में लड़कर समाप्त हो गए, बलराम ने चिरसमाधि ले ली और कृष्ण वन में ध्यान में बैठे। एक शिकारी का तीर उनके पैर में लगा और वे अपने धाम बैकुंठ चले गए। पढ़ें कृष्ण लीला के समापन की पूरी कथा।
अध्याय 59: पूरी कथा पढ़ें →
कन्या के रोते ही कंस कारागार पहुँचा और उसे पटकने चला, पर कन्या उसके हाथ से छूटकर आकाश में देवी दुर्गा के रूप में प्रकट हुई। देवी ने चेतावनी दी कि कंस का काल जन्म ले चुका है। पढ़ें पूरी कथा।
अध्याय 60: पूरी कथा पढ़ें →