श्रीकृष्ण बाल लीलाएँ · अध्याय 21

जंगल की आग: कृष्ण ने दावानल से गौओं की रक्षा कैसे की

छिपाछिपी खेलते समय जंगल में आग लग गई और गौएँ उसके बीच फँस गईं। कृष्ण ने गोपों से आँखें बंद करवाईं और पूरी आग को निगल लिया। पढ़ें पूरी कथा।

जंगल की आग: कृष्ण ने दावानल से गौओं की रक्षा कैसे की
जंगल की आग: कृष्ण ने दावानल से गौओं की रक्षा कैसे की — श्रीकृष्ण बाल लीलाएँ

एक दिन कृष्ण और उनके साथी चरागाह में छिपाछिपी खेल रहे थे और पास ही गौएँ चर रही थीं। अचानक गौओं के जोर-जोर से रम्भाने की आवाज आई और जब सब दौड़कर पहुँचे, तो जंगल में आग लग चुकी थी और गौएँ उसके बीच फँसी थीं।

छिपाछिपी के बीच जंगल में आग

एक दिन कृष्ण और उनके साथी चरागाह में छिपाछिपी का खेल खेल रहे थे। उनसे थोड़ी ही दूरी पर गौएँ चर रही थीं। अचानक कृष्ण और अन्य चरवाहों को गौओं के जोर-जोर से रम्भाने की आवाज सुनाई दी। वे तुरंत उनकी ओर दौड़े।

वहाँ पहुँचकर वे यह देखकर हैरान रह गए कि जंगल में आग लग गई है। घास सूखी होने के कारण आग बड़ी तेजी से फैल रही थी और हवा भी उसके फैलने में सहयोग कर रही थी। कृष्ण ने देखा कि गौएँ आग के बीच फँस गई हैं।

गोपों का भय और कृष्ण का आश्वासन

सारे गोप भय से चीखने लगे। गौएँ ही तो उनकी संपत्ति और आजीविका का साधन थीं। उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि गौओं की रक्षा कैसे करें। वे कृष्ण और बलराम से गौओं को दावानल से बचाने की प्रार्थना करने लगे।

कृष्ण ने उन्हें सांत्वना देते हुए कहा कि वे भय न करें, वे सारी स्थिति संभाल लेंगे। उन्होंने गोपों से आँखें बंद करके ईश्वर से सहायता की प्रार्थना करने को कहा।

कृष्ण ने निगल ली पूरी आग

गोप वैसा ही करने लगे जैसा कृष्ण ने कहा था। फिर कृष्ण ने अपना मुँह खोलकर गहरी साँस अंदर खींची। साँस के साथ ही उन्होंने जंगल में लगी आग को भी निगल लिया। कहीं एक जलता हुआ तिनका तक नजर नहीं आ रहा था, ऐसा लग रहा था जैसे वहाँ कभी आग लगी ही नहीं। कृष्ण मुस्कुराने लगे और उन्होंने गोपों से आँखें खोलने को कहा।

गोपों का धन्यवाद

जब गोपों ने आँखें खोलीं तो आग का लेशमात्र भी न पाकर हैरान रह गए। सभी गौएँ आनंद से कोमल घास चर रही थीं।

तब गोप कृष्ण से बोले कि मित्र, हम नहीं जानते तुमने जंगली आग को कैसे बुझा दिया। यह काम तो हमारा सारा गाँव मिलकर भी नहीं कर सकता था। हम तुमसे यह पूछेंगे भी नहीं। हम तो बस तुम्हारा धन्यवाद करते हैं कि तुमने हमारी गौओं की रक्षा करके हमें बर्बाद होने से बचा लिया।

इस कथा से क्या सीख मिलती है?

पहली सीख यह है कि संकट की घड़ी में घबराने के बजाय विश्वास रखना चाहिए। कृष्ण ने गोपों को भय छोड़कर ईश्वर से प्रार्थना करने को कहा, और उसी विश्वास के साथ पूरा संकट टल गया।

दूसरी सीख यह है कि सच्चे मित्र पर किया गया भरोसा कभी व्यर्थ नहीं जाता। गोपों ने कृष्ण से कोई प्रश्न किए बिना उनकी बात मानी, और कृष्ण ने उनकी आजीविका को बर्बाद होने से बचा लिया।

तीसरी सीख कृतज्ञता की है। गोपों ने यह जानने की जिज्ञासा से भी बढ़कर धन्यवाद को महत्व दिया। जब कोई हमारे संकट में काम आए, तो प्रश्न से पहले आभार प्रकट करना ही सच्ची मित्रता का लक्षण है।

कथा का सार

जंगल की आग की यह कथा बताती है कि जब तक कृष्ण साथ हैं, कोई संकट बड़ा नहीं है। ऐसी और कथाएँ पढ़ने के लिए इसी पुस्तक के दूसरे अध्याय देखें।