ब्रज के भक्त भाग 2 · अध्याय 19
श्रीवैष्णवदास बाबाजी
श्रीवैष्णवदास बाबाजी की प्रेरक हिंदी कथा। जानिए उनके जीवन, भक्ति और साधना से जुड़े महत्वपूर्ण प्रसंग।

श्रीवैष्णवदास बाबाजी का यह भक्त-चरित्र ब्रज की साधना, श्रद्धा और जीवन से जुड़े प्रसंगों को सामने लाता है। नीचे कथा को अलग-अलग विषयों में व्यवस्थित किया गया है।
भजन-साधना और नाम-स्मरण के प्रसंग
| कोसी |
जिस समय काम्यवनमें सिद्ध जयकृष्णदास बाबाजी महाराज भजन करते उस समय कोसीमें श्रीवैष्णवदास बाबाजी भी भजन करते। वे गौडीय-वैष्णव हुए भी एक लोहेका चिमटा रखा करते। सदा वृक्षके नीचे वास करते। मधुकरीका झोला वृक्षमें लटका दिया करते।
बाबा वाक्सिद्ध थे। शृंगारवटके श्रीश्रीनित्यानन्द-सन्तान श्रीपूर्णानन्द गोस्वामी प्रभुके कोई सन्तान न थी। उन्होंके आशीर्वादसे उन्हें श्रीनृसिंहानंद, श्रीप्रेमानन्द और श्रीयादवानन्दके रूपमें तीन पुत्र प्राप्त हुए थे।
सेवा, प्रसाद और समर्पण की घटनाएँ
उनकी महिमा सुन एक बार जोधपुरके राजा उनके पास गये। कुछ सेवा स्वीकार करनेका बहुत अनुरोध किया। वे बराबर यही कहते रहे- 'मुझे किमी प्रकारकी सेवा नहीं चाहिए।' पर, राजाने अपना हठ नहीं छोड़ा। तब विवश से उन्होंने राजासे एक मन्दिर बनावाकर श्रीराधागोविन्दकी सेवा प्रतिष्ठित करनेकों कहा।
राजाने उनकी आज्ञाका पालन किया। उनके द्वारा प्रतिष्ठित श्रीराधागोविन्दकी सेवा कोसीमें आज भी चल रही है।
व्रजभूमि और तीर्थ से जुड़ी घटनाएँ
बाबाकी महानताका पता इस बातसे चलता है कि गोवर्धन के सिद्ध कृष्णदास बाबा उनका भी उसी प्रकार सम्मान करते थे, जिस प्रकार काम्यवनके सिद्ध श्रीजयकृष्णदास बाबाका।
१. यह वृतान्त लगभग ५० वर्ष पूर्व श्रीअद्वैतदास पण्डित बाबाजीने श्रीहरिदासः राम को सुनाया था और उन्होंने अपने बँगला-ग्रन्थ 'गौड़ीय-वैष्णव जीवनमें इसका उल्लेख किया है।
सेवा और समर्पण — जीवन-संदेश
सेवा का मूल्य केवल बाहरी कार्य में नहीं, बल्कि उसके पीछे के निष्कपट भाव में भी होता है। इस चरित्र के प्रसंगों को पढ़ते समय सेवा के इसी भाव पर विचार किया जा सकता है।
कथा का सार
श्रीवैष्णवदास बाबाजी की कथा भक्ति, विनम्रता और साधना पर मनन करने का अवसर देती है। इस संग्रह में अन्य भक्तों के जीवन-प्रसंग भी पढ़ें।