ब्रज के भक्त भाग 2 · अध्याय 34
श्रीरामानन्ददास बाबाजी
श्रीरामानन्ददास बाबाजी की प्रेरक हिंदी कथा। जानिए उनके जीवन, भक्ति और साधना से जुड़े महत्वपूर्ण प्रसंग।

श्रीरामानन्ददास बाबाजी का यह भक्त-चरित्र ब्रज की साधना, श्रद्धा और जीवन से जुड़े प्रसंगों को सामने लाता है। नीचे कथा को अलग-अलग विषयों में व्यवस्थित किया गया है।
व्रजभूमि और तीर्थ से जुड़ी घटनाएँ
[ वृन्दावन ]
श्रीहट्ट जिलेके श्रीरामानन्ददास बाबाजी 'बाम कौपीना' सम्प्रदायमें दीक्षित थे। वे कुमार अवस्थासे ही वैरागी थे। चारों धामोंकी पैदल यात्रा करते हुए वृन्दावन आ गये थे। वृन्दावनमें उन्हें पता चला कि बाम कौपीना सम्प्रदाय एक उपसम्प्रदाय है। तबसे वे कौपीनकी गाँठ दाहिनी ओर बाँधने लगे।
निधुवनमें कई वर्ष तक भजन करनेके पश्चात् वे राधाकुण्ड चले गये। बडे प्रेमी और सरल हृदयके व्यक्ति थे वे । श्रवण-कीर्तनमें उनका भावोद्वार और रोना-धोना देख लोग चमत्कृत रह जाते। राजर्षि बनमाली राय उनसे बहुत प्रभावित थे, वे उन्हें अपने साथ वृन्दावन ले गये। वहाँ वे उनके साथ उनके विनोद-बागाचे रहकर भजन करने लगे।
भजन-साधना और नाम-स्मरण के प्रसंग
राजर्षि बहादुर और उनकी पत्नीके देहावसानके पश्चात् उनके ठाकुर श्रीविनोदजीकी सेवाकी देख-भाल वे ही करते। एक दिन उनका शरीर थोडा अस्वस्थ हुआ। उन्होंने कामिनीबाबू और श्रीमाधवदास बाबाको बुलवा भेजा। इशा वे अपना नित्य-कृत्य सदाकी भाँति करते रहे। उसके पश्चात् श्रीमद्भागवत-पाठ सुना। रात्रिमें वृन्दावनके कीर्तनियाँ श्रीरामदास बाबाजीसे 'रूपाभिसार' कीर्तन सुना। कीर्तनियोंको भोजन कराकर और दक्षिणा दे बिदा किया। तब श्रीमाधवदासजी, कामिनीबाबू और विपिनबिहारीदासने नाम-संकीर्तन प्रारम्भ किया। भाद्र मास था। रात्रि १२ बजे ठण्ड पड़ने लग गयी थी। इसलिए इन लोगोंने बाबाको भीतर ते चलनेको कहा। उत्तरमें उन्होंने कामिनीबाबूकी ओर देखा और थोड़ा हँसकर मुख श्रीरामदास बाबाजी
दिव्य अनुभूति और कृपा के प्रसंग
ढक लिया। कामिनीबाबू उनकी हँसीका अर्थ तब समझे जब दो घण्टे बाद उन्होंने उनका मुख खोलकर देखा। वे नित्य-लीलामें प्रवेश कर चुके थे !
नाम-स्मरण और एकाग्रता — जीवन-संदेश
नाम-स्मरण, भजन और एकाग्रता के प्रसंग साधना की निरंतरता की याद दिलाते हैं। यहाँ वर्णित जीवन-अनुभवों से पाठक अपनी साधना के लिए प्रेरणा ले सकते हैं।
कथा का सार
श्रीरामानन्ददास बाबाजी की कथा भक्ति, विनम्रता और साधना पर मनन करने का अवसर देती है। इस संग्रह में अन्य भक्तों के जीवन-प्रसंग भी पढ़ें।