ब्रज के भक्त भाग 2 · अध्याय 12
मौनी बाबा
मौनी बाबा की प्रेरक हिंदी कथा। जानिए उनके जीवन, भक्ति और साधना से जुड़े महत्वपूर्ण प्रसंग।

मौनी बाबा का यह भक्त-चरित्र ब्रज की साधना, श्रद्धा और जीवन से जुड़े प्रसंगों को सामने लाता है। नीचे कथा को अलग-अलग विषयों में व्यवस्थित किया गया है।
दिव्य अनुभूति और कृपा के प्रसंग
[ ग्वाल पोखरा ]
स्वामी श्रीस्वामिनीशरणजीके शिष्य श्रीमौनी बाबा एक सिद्ध महात्मा थे। हमे त्यागी और निरभिमानी, रसिक सन्त थे। उन्होंने पीलूके पत्ते चबाकर या केवल खेद है कि उनके सम्बन्धमें हम इतना ही जान पाये हैं कि वे मौनव्रतधारी, बड़े चना-चबैना खाकर ग्वाल पोखरामें भजन करते हुए राधाकृष्णके दर्शन किये थे। श्रीरूपमाधुरीजीने अपने एक कवित्तमें उनकी छवि इस प्रकार आँकी है-ग्वाल पोखरा स्थान, करै मौनी बाबा ध्यान,
व्रजभूमि और तीर्थ से जुड़ी घटनाएँ
व्रजमें न आन, सन्त प्रेम नैनमें नवेला, कीना दम्पति से मेला, हरिदासी है।
भक्ति-प्रेम और विरह की अनुभूति
स्वामिनीशरणको चेला, कुञ्जरसको उपासी है ।। पत्ते पीलूके जु खावे, रसभोग बिसरावे, कभी चने भोजन पावे, रहे जगसे उदासी है।
नैनों मांहि मुसकावे, लिखके बतरावे, कोई प्रेम सै जु जावे, ताको पूजै, सुखरासी है ।।
प्रेम और भक्ति — जीवन-संदेश
ईश्वर-प्रेम की अनुभूति भक्त-साहित्य का एक महत्त्वपूर्ण विषय है। इन प्रसंगों को श्रद्धा, संवेदनशीलता और समर्पण के संदर्भ में पढ़ा जा सकता है।
कथा का सार
मौनी बाबा की कथा भक्ति, विनम्रता और साधना पर मनन करने का अवसर देती है। इस संग्रह में अन्य भक्तों के जीवन-प्रसंग भी पढ़ें।