ब्रज के भक्त भाग 2 · अध्याय 14
काम्यवनके छोटे बाबा
काम्यवनके छोटे बाबा की प्रेरक हिंदी कथा। जानिए उनके जीवन, भक्ति और साधना से जुड़े महत्वपूर्ण प्रसंग।

काम्यवनके छोटे बाबा का यह भक्त-चरित्र ब्रज की साधना, श्रद्धा और जीवन से जुड़े प्रसंगों को सामने लाता है। नीचे कथा को अलग-अलग विषयों में व्यवस्थित किया गया है।
भजन-साधना और नाम-स्मरण के प्रसंग
हम काम्यवनके श्रीजयकृष्ण दास बाबाके चरित्रके प्रसंगमें एक 'छोटे बाबा'का वर्णन कर आये हैं। बहुत छोटी अवस्थामें गृह त्यागकर उन्होंने जयकृष्ण दास बाबाके अनुगत्यमें भजन करनेके लिए उनकी शरण ली थी। उन्होंने रागानुगा भजन सिखानेके उद्देश्यसे उनसे नवद्वीप जाकर अपनी गुरुप्रणाली ले आनेको कहा था। छोटे बाबा उनकी आज्ञा पालनकर हाथरस स्टेशन तक गये थे, पर व्रज छोड़ते दूर उनके प्राण छटपटा रहे थे। वे मन-ही-मन वृन्दादेवीसे प्रार्थना कर रहे थे कि गाडीपर बैठनेके पहले उनके प्राण निकल जाएँ। वृन्दादेवी की कृपासे हाथरस रेशन पहुँचनेके पूर्व गाड़ी छूट गयी थी और उन्हें काम्यवन लौट जाना पड़ा था।
उधर वृन्दादेवीने जयकृष्णदास बाबाको उन्हें बाहर भेजनके लिए डाँट बतायी थी और उनकी गुरुप्रणाली स्वयं उनके ठाकुरके सिंहासनके नीचे रख वहाँसे ले लेनेको कहा था। छोटे बाबाको वृन्दादेवीकी कृपासे गुरुप्रणाली लानेके लिए व्रज नहीं छोड़ना पड़ा था।
अब छोटे वाबा छोटे नहीं रहे हैं। भजन करते-करते बढे हो गये हैं। शरीर छोडनेके पूर्व जयकृष्णदास बाबाने उनसे कहा था- 'वजमें रहकर भजन करना। और कहीं न जाना। राधारानी तुमपर अवश्य कृपा करेंगी।'
जन्म, परिवार और प्रारम्भिक जीवन
पर अभी तक राधारानीने उनपर कृपा नहीं की है। उनकी विरह-वेदना असहा होती जा रही है।
एक दिन एक बालक और बालिकाने उनकी कुटियाके द्वारपर आकर कहा- 'बाबा, पानी प्याय दे।'
बाबाने कुटियासे निकलकर बालकको पानी पिला दिया। पानी पीनेके पश्चात् उसने बालिकाकी ओर इंगित करते हुए कहा- 'जाय मेरी बऊए प्याय दे।'
बाबाको हँसी आ गयी। उन्होंने कहा 'लाला, तेरे दुधके दाँत तो टूटे नाँय। बहू कहाँ ते आय गयी ?"
'बाबा, जाते मेरो व्याओ होय गो', बालकने उत्तर दिया।
लायो।' बालिका बोली- 'ना बाबा, मैं तो फूल बीनबे आयी। जे मोको बगदाय
बाबा बालिकाको पानी पिलाने लगे, पर उससे अञ्जलि बाँधना न आया। सारा पानी नीचे गिरने लगा। उन्होंने बालककी ओर देखते हुए कहा- 'तेरी बउए पानी पीनो तो आबेई नाँय।'
'बाबा, जे बड़ी भोरी है' कह बालकने अपनी अञ्जलि उसके मुँहमें लगा दी।
बाबाने करुएसे धीरे-धीरे अञ्जलिमें पानी उड़ेला। पानी पिलाकर बोले- 'लाला, साँझ हय गयी है। जाय घर कर आ।'
दिव्य अनुभूति और कृपा के प्रसंग
दोनों जाने लगे। जाते समय मुड़-मुड़कर मुस्कराते हुए बाबाकी ओर देखते रहे। बाबा भी मन्त्र-मुग्धकी तरह एकटक देखते रहे। थोड़ी दूर जाकर दोनों एकाएक अन्तर्धान हो गये।
तब स्वप्नसे जागते हुए बाबाकी चेतना जागी और वे यह कहकर रोदन करने लगे- 'हाय! आये और छल करके चले गये!'
रोदन करते-करते उन्हें तन्द्रा आ गयी। स्वप्नमें प्रिया-प्रियतमने कहा- 'बाबा हमई थे। भजन करतो रह। कालान्तरमें तोय दर्शन देंगे।'
छोटे बाबाके मनमें बहुत दिनसे लालसा थी कि जैसे भगवान्ने गुरुजीके हाथसे पानी पिया था, वैसे ही उनके हाथसे पियें। पर वे चाहते थे कि राधाकृष्ण की जगह भक्तिमती श्रीआनन्दीबाईजी
कृष्ण-बलराम उनके ऊपर इस रूपमें कृपा करें। वाञ्छाकल्पतरु भगवान्ने उनके ऊपर इसी रूपमें कृपा की। साक्षात् दर्शन भी अपने कथनानुसार कालान्तरमें उन्हें अवश्य दिये होंगे। पर कब और किस प्रकार, यह भक्त जानें और भगवान्! और कोई क्या जाने ?
प्रेम और भक्ति — जीवन-संदेश
ईश्वर-प्रेम की अनुभूति भक्त-साहित्य का एक महत्त्वपूर्ण विषय है। इन प्रसंगों को श्रद्धा, संवेदनशीलता और समर्पण के संदर्भ में पढ़ा जा सकता है।
कथा का सार
काम्यवनके छोटे बाबा की कथा भक्ति, विनम्रता और साधना पर मनन करने का अवसर देती है। इस संग्रह में अन्य भक्तों के जीवन-प्रसंग भी पढ़ें।